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दशहरा पर्व: चांदी की पालकी में सवार होकर नए शहर में होगा भगवान महाकाल का आगमन, परंपरानुसार बदला जाएगा श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर का ध्वज
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
दशहरा पर्व, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। वहीं धार्मिक नगरी उज्जैन में परंपरानुसार भगवान महाकाल की सवारी निकलेगी, साथ ही महाकाल मंदिर के शिखर पर ध्वज बदला जाएगा।
दरअसल, वर्ष में एक बार विजयादशमी पर भगवान महाकाल की सवारी का नए शहर में आगमन होता है। इस दौरान भगवान महाकाल चांदी की पालकी में सवार होकर नए शहर में प्रजा को दर्शन देने के लिए आते हैं। इस वर्ष 12 अक्टूबर यानी की आज शाम 4 बजे परंपरा अनुसार श्री महाकालेश्वर मंदिर से बाबा महाकाल की सवारी निकलेगी, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए दशहरा मैदान पहुंचेगी। यहां पर रावण दहन के पूर्व बाबा महाकाल का विधि-विधान से पूजन होगा। इसके बाद सवारी पुन: मंदिर के लिए रवाना हो जाएगी।
बता दें, इस वर्ष सवारी का रूट परिवर्तित किया गया है। नवीन परिवर्तित मार्ग के अनुसार, सवारी शाम 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर निकलकर गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, सराफा, सतीगेट, नई सड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवासगेट, चामुण्डा चौराहा से टॉवर के रास्ते शहीद पार्क, घास मंडी चौराहा, माधव नगर हॉस्पिटल, पुलिस कंट्रोल रूम, एल.आई.सी. ऑफिस होते हुए लीनन/रेमंड शो रूम के समीप वाली गली से दशहरा मैदान पहुंचेगी।
दशहरा मैदान पर बाबा महाकाल का विधि-विधान से पूजन होगा, इसके पश्चात सवारी पुन: मंदिर के लिए रवाना हो जाएगी। इस दौरान बाबा महाकाल की सवारी दशहरा मैदान से श्रीगंगा होटल के समीप वाले मार्ग से देवास रोड के रास्ते, तीन बत्ती चौराहा, माधव क्लब रोड होते हुए धन्नालाल की चाल से लोकनिर्माण विभाग कार्यालय के सम्मुख से फ्रीगंज ओवर ब्रिज के रास्ते संख्याराजे धर्मशाला, देवासगेट, मालीपुरा, दौलतगंज चौराहा, इंदौर गेट, गदापुलिया, हरिफाटक ब्रिज, बेगमबाग से कोट मोहल्ला चौराहे के रास्ते पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
वहीं, श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में सायं पूजन के पश्चात श्रद्धालुओं को श्री महाकालेश्वर भगवान के श्रीहोल्कर (मुखारविन्द) स्वरूप के दर्शन होंगे। साथ ही श्री महाकालेश्वर मंदिर में परंपरानुसार महाकाल मंदिर के शिखर पर ध्वज बदला जाएगा।